तो क्या ?

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अंधेरा जो रात होते ही पसर गया 
तो क्या ?
सवेरा है, कल फ़िर रोशन हो जाएगा

सूरज जो सांझ होते ही ढल गया 
तो क्या ?
किरणों में, कल फ़िर उदय हो जाएगा

सावन जो बादलों में कैद हो गया
तो क्या ?
बूंदों में, कल फ़िर बरस जाएगा

मौसम जो आज गर्मी में तप गया
तो क्या ?
झोंकों में, कल फ़िर ठंडा हो जाएगा

गम जो दिल का नासूर हो गया
तो क्या ?
अश्कों में, कल फ़िर छलक जाएगा

इश्क़ जो तेरा आज अधूरा रह गया
तो क्या ?
शायरी में, कल फ़िर पूरा हो जाएगा

 © अपूर्वा बोरा

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