उदासी

सुबह की ये उदासी
आसमान की शून्यता में पसरी
पौ फटने से पहले की ख़ामोशी
गुनगुनी चाय संग घुलने वाली
ये पल दो पल की नाउम्मीदी
दिल के कोने भी हैं सवाली
जवाबों से भरे जज़्बात से ख़ाली

दोपहर की ये उदासी
धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ती
सुस्त अलसाई ज़िंदगी
बादलों संग फिरने वाली
ये ख़यालों की असीम कड़ी
दिल के कोने हैं सवाली
जवाबों से भरे जज़्बात से ख़ाली

शाम की ये उदासी
बड़ी देर तक ताकती रही
पंछियों के घर लौटने की घड़ी
ढलते सूरज संग ढलने वाली
ये भीतर कुम्हलाती रोशनी
दिल के कोने हैं सवाली
जवाबों से भरे जज़्बात से ख़ाली

रात की ये उदासी
कोयल की कुहू नहीं
ऊपर से बिस्तर भी खाली
दबे पाँव घर करने वाली
ये रात की हमसफ़र तन्हाई
दिल के कोने हैं सवाली
जवाबों से भरे जज़्बात से ख़ाली

© अपूर्वा बोरा​

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