वह चल पड़ी है

जज़्बातों को अपने 
कागज़ पर
उतार
लिफ़ाफ़े की 
गिरफ्त में
कर
वह चल पड़ी है

लिफ़ाफ़े को अपने
सीने से
लगा
धड़कन की
रफ़्तार
पकड़
वह चल पड़ी है

धड़कन को अपनी
औरों से
छिपा
मोहब्बत की
दस्तक
देकर
वह चल पड़ी है

मोहब्बत को अपनी
होठों में
दबा
तेरे नाम की
चिट्ठी
सौंप कर
वह चल पड़ी है

जज़्बातों को अपने 
कागज़ पर
उतार
लिफ़ाफ़े की 
गिरफ्त में
कर
वह चल पड़ी है

 © अपूर्वा बोरा

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