वो

Photo by Pablo Heimplatz on Unsplash

वो,
कैसा था?

वो,
कैसी थी?

वो,
सवेरे का ख़ुमार था
या बीती रात का सबब

वो,
कुछ सूरज की तपिश थी
या चाँदनी की थी तलब

वो,
मोगरे से ढका आंगन था
या गुलाबों से सजा बिस्तर

वो,
कुछ फूल सी खिली थी
या कुछ महक उठा था इतर

वो,
मद में झूमता शायर था
या मोहब्बत का आगाज़

वो, गालों का सुर्ख़ एहसास थी
या ह्रदय में उमड़ता जज़्बात

वो,
न जाने ऐसा था
या वैसा था
जैसा था
बस, मेरा था।

वो,
न जाने ऐसी थी
या वैसी थी
जैसी थी
बस, मेरी थी।

 © अपूर्वा बोरा

Leave a Reply

Close Menu