याद तुम ही आते हो

Photo by Toa Heftiba on Unsplash
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बिखरे बिखरे से रहते हैं मेरे ख़याल
हालात के धागे में पिरो कर बुनने
किसी रोज़ आओ ये कहानी सुनने

हो नहीं यहाँ तो खयालों में क्यों छेड़ जाते हो
ज़ुल्फ़ सँवारती हूँ मैं मग़र याद तुम ही आते हो

हो नहीं यहाँ तो ख्वाबों में क्यों सताते हो
आँखें मूँदती हूँ मैं मग़र याद तुम ही आते हो

हो नहीं यहाँ तो दिल में दस्तक क्यों दे जाते हो
धड़कनें काबू करती हूँ मैं मग़र याद तुम ही आते हो

हो नहीं यहाँ तो इशारों से क्यों उलझाते हो
भुलाना चाहती हूँ मैं मग़र याद तुम ही आते हो

हो नहीं यहाँ तो आरज़ू में झलक क्यों जाते हो
दुआ नहीं माँगती हूँ मैं मग़र याद तुम ही आते हो

हो नहीं यहाँ तो यादों में घर क्यों बनाते हो
कलम उठाती हूँ मैं मग़र याद तुम ही आते हो

अधूरे अधूरे से रहते हैं मेरे ख़याल
उम्मीद की रोशनी के रास्ते चुनने
किसी रोज़ आओ ये कहानी पूरा करने

© अपूर्वा बोरा​

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